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7+ [Best] Panchatantra Stories in Hindi

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Panchatantra Stories in Hindi

Panchatantra Stories in hindi:- पंचतंत्र की कहानियां हमारे जीवन में अद्भुत बदलाव ला देती है इन कहानियों से मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान भी मिलता है और ये अत्यंत सरल भाषा में लिखी होती है,Panchatantra Stories hindi सभी विषयों को बहुत ही सरलता से प्रस्तुत की जाती है丨प्रत्येक कहानी कुछ न कुछ नया सन्देश देती नजर आती है丨दोस्तों आपके लिए प्रस्तुत है कुछ ऐसी ही Panchatantra Ki Kahaniya जो inspiration से भरी हुई है , साथ ही सफल व्यक्तियों के संघर्ष की कहानीया और भी बहुत सारी कहानियाँ।

तो चलिए शुरू करते हैं

Table of Contents

Panchatantra Stories in Hindi #1 | चुहिया का स्वयंवर | The Wedding Of The Mice

Panchatantra Stories in hindi:-गंगा (ganga) नदी किनारे एक कुटिया में एक ऋषि मुनि अपनी पत्नि के साथ रहा करते थे. दुर्भाग्य से उनकी कोई भी संतान नहीं थी. दोनों को बस संतान की कामना थी. अतः संतान हेतु वे सदा ईश्वर से ये ही प्रार्थना किया करते थे कि उन्हें संतान हो जाए.

एक दिन जब मुनि नदी किनारे दोनों हाथ फैलाये ईश्वर से की प्रार्थना कर रहे थे. तभी ऊपर आकाश में एक पक्षी उनके ऊपर से गुजरा. उसने अपनी चोंच में एक चुहिया को दबाया हुआ था.

मुनि के ऊपर से गुजरते वक़्त चुहिया (Mice) उसकी की चोंच से छुड़कर मुनि की हथेली में जा गिरी, ऋषि मुनि ने सोचा कि शायद भगवान ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ये चुहिया उन्हें संतान रुप में प्रदान की है.

मुनि में अपने प्रताप से चुहिया को एक सुंदर कन्या में बदल दिया और अपने घर ले गए | 

और अपनी पत्नि से बोले, “ ईश्वर ने हमारी प्रार्थना सुन कर यह कन्या हमें प्रदान की है. अब से ये हमारी पुत्री है और इसके लालन पालन की संपूर्ण जिम्मेदारी हमारी है.”

मुनि की पत्नि ने उस कन्या को अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया. और कन्या मुनि की कुटिया में बड़ी होने लगी.

जब कन्या बड़ी हो गई. तब मुनि की पत्नि को उसके विवाह की चिंता सताने लगी. एक दिन उसने मुनि से कन्या के लिए कोई योग्य वर ढूंढने को कहा.

कुछ देर विचार के बाद मुनि इस निष्कर्ष निकला कि सूर्यदेव ही उनकी कन्या के लिए श्रेष्ठ वर हैं. उन्होंने सूर्यदेव से दर्शन देने कि प्राथना कि, और सूर्यदेव के प्रकट होने पर मुनि ने अपनी पुत्री से पूछा, “क्या तुम्हें सूर्यदेव अपने पति के रूप में स्वीकार है?”

पुत्री ने उत्तर दिया, “क्षमा करें पिताश्री. सूर्यदेव में इतना ताप है कि इनके समक्ष मैं क्षण भर में राख में परिवर्तित हो जाऊंगी. मैं इनसे कैसे विवाह कर सकती हूँ? कृपा कर आप मेरे लिए कोई दूसरा वर ढूंढिए.”

Panchatantra Stories in Hindi #2 | चालाक बंदर और मगरमच्छ | The Monkey and The Crocodile

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किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था, उस पर एक बंदर रहता था,  उस पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे अंदर में भरपेट आता और मौज उड़ाता था ।

वह अकेले ही मजे से दिन गुजार रहा था, एक दिन एक मगरमच्छ उस नदी में से पेड़ के नीचे आया बंदर ने पूछा

तुम कौन हो भाई?

मगर ने बताया बड़ी दूर से खाने की तलाश में आया है ।

बंदर ने कहा, ‘भाई यहां खाने की कोई कमी नहीं है। इस पेड़ पर बड़े ही मीठे और स्वादिस्ट फल लगते हैं। मै अभी तुम्हे कुछ फल देता हूँ, चखकर देखो। अच्छे लगे तो मैं और दूंगा। जितने जी चाहें खाऒ।’ बंदर ने पेड़ से तोड़कर बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए।

मगर ने कहा, ‘वाह भाई , फल तो बहुत मजेदार हैं।’

मगर ने बंदर से कहा भाई क्या मैं कल भी आ सकता हूं

बंदर ने कहा क्यों नहीं भाई तुम मेरे मेहमान हो, रोज आऒ और जितने जी चाहें खाऒ।’

इस तरह बंदर और मगर की दोस्ती हो गई मगर हर रोज वहां आता दोनों मिलकर खूब फल खाते हैं बंदर भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था |

कुछ दिन बाद में मगर ने बंदर को बताया कि वह अकेला नहीं है उसकी एक पत्नी है जो नदी में उस पार उसके साथ  रहती है

बंदर ने कहा तुमने पहले क्यों नहीं बताया आज तो अपनी पत्नी के लिए भी बहुत सारे पर लेकर जाना, उस दिन मगर अपनी पत्नी के लिए बंदर की द्वारा दिए फल ले गया।

मगर की पत्नी को फल बहुत पसंद आये उसने मगर से कहा तुम रोज ऐसे स्वादिष्ट फल लाया करो

इस तरह मगर रोज भरपेट फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता

मगर की पत्नी तो फल खाना बहुत अच्छा लगता पर अपने पति का देर से घर लौटना पसंद नहीं था | एक दिन मगर की पति ने मगर से कहा कि अगर वह बंदर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है कलेजा कितना मीठा होगा |

मुझे उस  बंदर का कलेजा चाहिए, मगर ने उसे बहुत समझाया पर उसने मगर की एक न सुनी उसे तो बस बंदर का कलेजा चाहिए था

अब मगरमच्छ दावत के बहाने बंदर को अपनी पीठ पर बिठाकर अपने घर ले जाने लगा नदी के बीच में उसने बंदर को अपनी पत्नी की कलेजे वाली बात बता दी, इस पर बंदर ने कहा बस इतनी सी बात किंतु मगर भाई मैं अपना कलेजा तो पेड़ पर छोड़ आया हूं मैं अपने कलेजे को बड़ी हिफाजत से पेड़ पर रखता हूं

मगर उसकी बातों में आ गया और मैं उसे वापस पेड़ पर ले गया बंधन में तुरंत छलांग मारी और पेड़ पर चढ़ गया उसने हंसकर कहा -जाओ मूर्ख घर जाओ और अपनी पत्नी से घर जाकर कहना कि तुम दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हो भला कोई भी अपना कलेजा निकाल कर अलग रख सकता है

Moral of the Story:-बंदर की इस समझदारी से हमें पता चलता है कि मुसीबत के वक्त हमें कभी ठहरे नहीं खोना चाहिए

Panchatantra Stories in Hindi #3 | Kamchor

बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे वह एक बंदर भी रहता था जो जानवरों में सबसे चालक था एक दिन सभी जानवर एक साथ बैठे थे वे सभी परेशान थे, उनकी परेशानी यह थी कि जब दूर दराज से उनके नाम की कोई चिट्ठी आती थी तो उन्हें लाने में जिराफ काफी समय लगाता है  और बगैर पैसा दिए कोई भी चीज उन्हें नहीं मिलती थी एक दिन सब ने बैठकर सब की सहमती से यह निर्णय लिया कि जंगल का डाकिया बन्दर को बनाया जाए क्योंकि वह चतुर और चालाक भी है उस दिन से बंदर को जंगल का डाकिया बना दिया गया |

बंदर समय पर सभी का डाक ला कर दे देता था बंदर ने देखा कि उसे सभी उसे चाहते हैं और उसने पैसे की जगह हर एक से केला लेना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे बंदर कामचोर होता गया और उसकी कमजोरी इतनी बढ़ गई की धीरे-धीरे उसने सभी से पैसे लेना शुरू कर दिया, जब सभी ने देखा कि अब बंदर कामचोर हो गया है और सभी से पैसे लेने लगा है और सामने एक बार फिर एक बैठक आयोजित की और सर्वसहमति से निर्णय लिया कि अब बंदर को हटा दिया जाए और भालू को का डाक़िया बना दिया जाए परंतु इसी बीच हठी वहां आ गया और बोला अब से इस जंगल में कोई डाकिया नहीं बनेगा तो सभी जानवरों ने उससे कहा कि नया डाकिया नहीं बनेगा तो हम लोगों को चिट्ठी को पहुँचायेगा।

हाथी ने कहा आप सभी शहर में अपने रिश्तेदार,दोस्तों, भाई बहनों और माता-पिता को यह संदेश भिजवा दो कि अब से कोई चिट्ठी ने लिखें तो देखना बंदर घर में बैठा रहेगा और जिस तरह हमें बंदर की जरूरत है उसी तरह बंदर को भी हमारी बहुत-बहुत हैं

भालू ने कहा मुझे आपका आईडिया बहुत पसंद आया मगर अगर शहर में किसी को कुछ हो गया तो खबर कैसे पता लगेगी, सभी जानवर एक साथ बोले हा हा  बताओ कैसे पता लगेगी?

हाथी ने कहा सब शांत होकर मेरी बात सुनो हम सब मिलकर अपने जंगल में एक टेलीफोन बूथ खोलेंगे और तो उससे बात हो जाया करेगी, सभी जानवर अपने अपने घर में टेलीफोन लगा लें जिससे उन्हें कभी डाकिए के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा,यह सुनकर सभी जानवर बहुत खुश हो गए, यह सब बातें बंदर भी सुन रहा था उसे अपनी भूल का एहसास हुआ और उसने पछतावे के साथ सभी जानवरों से माफी मांगी

इस पंचतंत्र की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि हमें अपना काम इमानदारी से करना चाहिए और काम चोरी नहीं करनी चाहिए ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है

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Friend ummed hai aap sb ko Panchatantra stories hindi pasand aayi hogi. friends aap sb ke liye hum yu hi acchi – acchi Panchatantra Stories in Hindi Leke aate rahege bas aap sb ka pyar yu hi milta rhe. dosto aap sab ke pyar ki vjha se humne bhaut ki kaam time mai ek acchi friendlist pa li hai iske liye aap sb ka dil se Big Thanks .

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