Connect with us

Stories

10+ [Best] Moral Stories in Hindi For Kids

moral-stories-in-hindi

Are you searching Hindi stories? So here you find a big collection of Moral Stories in Hindi .we provide 150+ Moral Stories . These Hindi stories with moral may also be  helpful for Guardian. I hope you enjoy wishestatus website.

Best Moral stories in Hindi

baaj ki udaan | बाज़ की उड़ान

बाज-की-उड़ान-wishestatus.com

एक बार की बात है गलती से एक बाज का अण्डा मुर्गी के अंडों के बीच आ के मिल गया, फिर कुछ दिनों के बाद उन अंडों में से चूजे निकले और बाज के अंडे में से बाज का बच्चा निकला, बाज का बच्चा उन्ही मुर्गी के बच्चो के साथ बड़ा होने लगा|

वो वही करता जो चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्ही की तरह चू-चू करता|

बाकि चूजों की तरह वो भी बस थोड़ा ही उड़ पाता और पंख फड़-फाड़ते हुए नीचे आ जाता,फिर एक दिन उसने आकाश में उड़ता हुआ एक पक्षी देख जो खुले आकाश में बड़ी शान से उड़ रहा था | तब उसने बाकि चूजों से पूछा की-

“इतनी ऊंचाई पर उड़ने वाला ये शानदार पक्षी खून है ?”

तब सुजो ने कहा- अरे ये तो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही शक्तिशाली और विशाल होता है, लेकिन तुम उस पक्षी की तरह नहीं हो तुम तोह केवल एक चूजे हो!

बाज के बच्चे ने चूजों की बात सच मानकर कभी वैसा करने की कोशिश तक नहीं की और जिंदगी भर चूजों की तरह रहा और एक दिन बिना अपनी असली ताकत जाने ऐसे ही मर गया |

दोस्तों, हममे से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपनी असली ताकत जाने बिना ही एक normal जिंदगी जीते रहते है

हम ये भूल जाते है की हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी है हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं पर फिर भी बस एक औसत जिंदगी जी कर बड़े बड़े मौके भी गवां देते है

आप उन चूजों की तरह मत बनिए, अपनी क़ाबलियत पर भरोसा रखिये, आप चाहे जहां हो, जिस परिवेश में हो, अपनी क्षमताओं को पहचानिये और आकाश की उचाईयो पर उड़ कर देखिये क्युकी ये ही आपकी वास्तविकता है|

New Moral Stories in Hindi

Mitrata| मित्रता

हमारे इस पेज के जरिये हम आपको बतायेगे कुछ रोचक कहानियाँ, जो न सिर्फ मनोरंजन से भरी होगी बल्कि आपके लिए प्रेणा का काम भी करेगी। हम पूरी उम्मीद करते है की इन कहानियों के माध्यम से हम आपके समक्ष कुछ प्रेणादायक बाते पहुंचा सके 

और इसी के साथ हमारी कहानी का विषय होगा “मित्रता” जिसके जरिये हम आपको बतायेगे की एक मित्र का जिस में होना कितना अनिवार्य है। 

एक बार की बात है एक गाँव में  बहुत ही बड़ा तालाब था और उसके तट पर एक मोर रहता था। वही पास के तट पर एक मोरनी भी रहती थी। एक दिन मोर ने मोरनी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा । तभी मोरनी ने मोर से पूछा ” तुम्हारे कितने मित्र है ?” मोर ये सुनकर कुछ आश्चर्याचकित हुआ और सोचने लगा की विवहा के प्रस्ताव से मित्र का क्या सम्बन्ध होगा ? 

उसने मोरनी से कहा- मेरा कोई मित्र नहीं है ! मोर का उत्तर सुनकर मोरनी के विवहा से इंकार कर दिया।

मोर इस बात से बहुत दुखी हुआ । 

और मोरनी से विवहा करने की खातिर उसने शेर , मेढ़क और शेर के लिए शिकार का पता लगाने वाली टिहरी से दोस्ती कर ली। 

इसके पश्चात ही उसने यह समाचार जाकर मोरनी को सुनाया , जिसे सुनकर मोरनी बहुत ही प्रस्न हुई और मोर से विवहा करने के लिए तैयार हो गयी ।

और दोनों ने विवहा कर लिया ।

रहने के लिए एक पेड़ पर खोंसला बनाया और उसमे ही अण्डे दियाा |  उनके अलावा और न जाने कितने पक्षी उस पेड़ पर रहते थे | सभी कुछ भली प्रकार से चल रहा था | तभी एक दिन कुछ शिकारी वहाँ  शिकार के लिए पहुंचे | 

उन शिकारी को दिन भर कोई शिकार नहीं मिला तो वे थककर उसी पेड़ की छाया के नीचे बैठ गए जिस पेड़ पर मोरनी ने अण्डे दिए थे | और वे शिकारी सोचने लगे “पेड़ पर चढ़कर बच्चो और अंडो से ही क्यों न अपनी भूख मिटाई जाये | 

मोर और मोरनी ये सुनकर भारी चिंता में पड़ गए और परेशान होकर ये सोचने लगे की क्या किया जाए| 

तभी मोर परेशान होकर आपने दोस्तों के पास सहयता के लिए पहुंचा और मदद की गुहार लगाने लगा, फिर क्या था– टिटहरी ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया आवाज सुनकर शेर समझ गया के पेड़ के पास कोई शिकारी है | 
 
तभी अचानक चेर पेड़ के पास पहुंच गया जहां शिकारी बैठे थे | इतने ढेर में मेढ़क भी पानी से निकल कर भर आ गया | शिकारी शेर को देख कर भाग खड़े हुए | लेकिन जाते जाते शिकारियों ने मेढ़क को साथ ले जाने की बात सोची और जैसे ही मेढ़क को पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाया मेंढक फुदक कर पानी में चला गया | 
 
और शिकारियों के पैर दलदल में फस गया | 
 
इतनी ही देर में शेर वह पहुंच गया तथा शेर ने शिकारियों को ठिकाने लगा दिया |  
मोरनी ने मोर से कहा -“विवहा से पूर्व मैंने तुम्हारे दोस्तों के बारे में पूछा था ,” वो इसलिए क्युकि मित्र भी हमारी जिंदगी का अहम् हिस्सा है | 
 
अगर आज तुम्हारे मित्र न होते तो उन शिकारियों ने हमे मार दिया होता | इसलिए मित्रता भी आवश्यक है| 
 

Short Moral Stories in Hindi for Kids

The Fox and The Stork | लोमड़ी और सारस

ये बात बहुत समय पहले की है एक जंगल में बहुत सारे पशु पक्षी रहा करते थे| सभी जानवर आपस में बहुत प्रेम भाव से मिलजुल कर रहते थे| उसी जंगल में एक  एक अत्यधिक चतुर लोमड़ी रहती भी थी। उस लोमड़ी की मित्रता एक सारस से थी | दोनों पक्के दोस्त थे |

मगर बेचारा सारस बहुत सीधा-साधा सच्चा था। एक दिन लोमड़ी ने सोचा कि क्यों न सारस के साथ कुछ हंसी मजाक कर लिया जाए।

यही सोचकर एक दिन लोमड़ी ने सारस से कहा हमारी दोस्ती कितने दिनों से है पर हमने कभी भी एक दुसरे को दावत नहीं दी|

उसने सरस की अपने यहां भोजन का न्योता दिया। सारस ने उसकी दावत का निमंत्रण खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया|

अगले दिन जब सारस लोमड़ी के घर दावत के लिए पहुँचा तो लोमड़ी ने भी उसका स्वागत किया| खाने में लोमड़ी ने सारस की मनपसंद खीर बनाई थी| जब खाने का समय हुआ तो लोमड़ी एक चौड़े बर्तन में खीर परोस कर ले आई| दोनों जैसे ही ख़ीर खाने लगे तो सारस की चोंच बड़ी होने के कारण डूब नहीं रही थी इस लिए खीर का आनंद नहीं ले सका| लोमड़ी चतुर चालक फटाफट सारी खीर चाट गई|

बिचारा सारस भूखा ही रह गया| लेकिन सारस लोमड़ी की चालाकी को समझ गया था | अब सारस ने लोमड़ी को सबक सिखाने की ठानी |

फिर एक दिन सारस ने भी लोमड़ी को अपने घर भोजन का निमंत्रण दिया | लोमड़ी ने भी दावत को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया|

अगले दिन लोमड़ी बड़े चाव से सारस के घर दावत उड़ाने चली गई| सारस ने भी उसकी मनपसंद खीर बनाई थी|

जब खाने का समय आया तो सारस लोमड़ी को सबक सीखने के लिए एक पतले मुंह वाले बर्तन में खीर परोस कर ले आया और लोमड़ी को खाने का आग्रह किया|

जब लोमड़ी खाने लगी तो उसकी जीभ खीर तक पहुंची ही नहीं सकी | सारस ने अपनी लम्बी चौंच से सारी खीर उड़ा डाली | लोमड़ी बेचारी को भूखे पेट ही घर वापस आना पड़ा और उससे अपने किए पर काफी पछतावा भी हुआ|

एक बार की बात है गलती से एक बाज का अण्डा मुर्गी के अंडों के बीच आ के मिल गया, फिर कुछ दिनों के बाद उन अंडों में से चूजे निकले और बाज के अंडे में से बाज का बच्चा निकला, बाज का बच्चा उन्ही मुर्गी के बच्चो के साथ बड़ा होने लगा|

वो वही करता जो चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्ही की तरह चू-चू करता|

बाकि चूजों की तरह वो भी बस थोड़ा ही उड़ पाता और पंख फड़-फाड़ते हुए नीचे आ जाता,फिर एक दिन उसने आकाश में उड़ता हुआ एक पक्षी देख जो खुले आकाश में बड़ी शान से उड़ रहा था | तब उसने बाकि चूजों से पूछा की-

“इतनी ऊंचाई पर उड़ने वाला ये शानदार पक्षी खून है ?”

तब सुजो ने कहा- अरे ये तो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही शक्तिशाली और विशाल होता है, लेकिन तुम उस पक्षी की तरह नहीं हो तुम तोह केवल एक चूजे हो!

बाज के बच्चे ने चूजों की बात सच मानकर कभी वैसा करने की कोशिश तक नहीं की और जिंदगी भर चूजों की तरह रहा और एक दिन बिना अपनी असली ताकत जाने ऐसे ही मर गया |

दोस्तों, हममे से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपनी असली ताकत जाने बिना ही एक normal जिंदगी जीते रहते है

हम ये भूल जाते है की हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी है हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं पर फिर भी बस एक औसत जिंदगी जी कर बड़े बड़े मौके भी गवां देते है

आप उन चूजों की तरह मत बनिए, अपनी क़ाबलियत पर भरोसा रखिये, आप चाहे जहां हो, जिस परिवेश में हो, अपनी क्षमताओं को पहचानिये और आकाश की उचाईयो पर उड़ कर देखिये क्युकी ये ही आपकी वास्तविकता है|

Best short Moral stories in hindi

मनुष्य की कीमत

नमस्ते दोस्तों, आज जो कहानी हम आपके लिए लेकर आएँ हैं वह नैतिक शिक्षा से जुडी कहानियों  ( Moral Stories in Hindi ) में से ही है । अगर आपको ये कहानियां पसंद आये इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ शेयर करियेगा ।

एक दिन एक बालक के मन में एक प्रश्न उठा और उसने अपने पिता से जाकर वो प्रश्न किया – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”

पिताजी एक छोटे से बालक से ऐसा गंभीर सवाल को सुन कर कुछ ढेर के लिए हैरान रह गये.

फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत कठिन है, वो अनमोल है.”

बालक – क्या सभी मनुष्य उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण होते है ?

पिताजी – हाँ बेटे.

बालक पिताजी से – मै कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई अमीर तो कोई गरीब क्यो? किसी की इज्जत कम तो किसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर के लिए फिर शांत हो गए और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा लोहे का रॉड लाने के लिए कहा.

जैसे ही बच्चा रॉड लाया पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?

बालक ने उत्तर दिया – 200 रूपये.

पिताजी – लेकिन अगर मै इस रॉड के बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोचा फिर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा पिताजी लगभग 1000 रूपये का .

पिताजी – और अगर मै इस लोहे से बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?

बालक कुछ देर तक कुछ गणना करता रहा और एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी पिताजी.”

फिर पिताजी उसे समझाया – “ठीक इसी प्रकार मनुष्य की भी कीमत इसमे नही की अभी वो अब क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है.”

अब बालक की समझ में सब कुछ आ गया .

दोस्तों हम अक्सर अपनी सही कीमत आंकने मे गलती कर देते है.हम अपनी अब की स्तिथि को देख कर अपने आप को बेकार समझने लगते है. और अपनी सही कीमत को नहीं पहचानते .दोस्तों हमारा जीवन हमेशा उमीदो से भरा होता है. हमारी जीवन मे कई बार समय अच्छा नहीं होता पर इससे हमारी कीमत  कम नही होती है. हमे जो ये मनुष्य रूपी जीवन मिला है ये बहुत अनमोल हैं . हमें हमेशा अपने को improve करते रहना चाहिये और ताकि हमारे कदम सही कीमत प्राप्त करने की दिशा में बढ़ते रहे.

Moral stories for kids in hindi

एक मुर्ख मित्र

moral-stories-in-hindi

एक बहुत धनवान राजा हुआ करता था। उसके पास एक पालतू बन्दर था। राजा उसे अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था। वह

बन्दर से बार-बार एक ही बात कहता था कि, मेरे मित्र, तुमसे अच्छा मेरा कोई और मित्र नहीं है। प्रतिदिन सुबह को राजा अपने बन्दर के साथ अपने शाही बगीचे में सैर को जाता था। रोज की तरह , सुबह को राजा अपने बगीचे में टहल रहा था, तभी बंदर की नज़र घास में छिपे हुए साँप पर पड़ी जो राजा को काटने की तैयारी में था। बन्दर ने अपने मालिक को बचाने सही समय पर साँप को, झपट कर पकड़ लिया और उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। इस प्रकार बन्दर ने राजा की जान बचा ली। जब राजा को इस बात का पता चला तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। राजा को अपने बन्दर की इतना बड़ा गर्व था, की शीघ्र ही उसने अपने मंत्रियो के विरोध के बावजूद बन्दर को अपना निजी अंगरक्षक नियुक्त कर दिया।

राज्य के मंत्रियो ने राजा से खूब अनुरोध किया कि बन्दर सिर्फ एक जानवर है, और वह मनुष्यों की भांति अंगरक्षक का कार्य नहीं कर सकता। किन्तु राजा ने किसी की नहीं सुनी । राजा ने कहा कि ‘बन्दर उसे बहुत प्यार करता है और वह उसके प्रति बहुत वफादार भी है। अंगरक्षक का सबसे

महत्त्वपूर्ण गुणा ये ही होता है। क्या तुम सब ने नहीं देखा कि किस प्रकार उसने मेरी जान बचायी?” राजा के इन शब्दों ने उन सब लोगों को चुप कर दिया।

बन्दर को अंगरक्षक बने कई महीने बीत गए । और एक दिन जब राजा अपने शयनकक्ष में आराम कर रहा था उसने बन्दर से कहा ‘मैं बहुत थका हुआ महसूस कर रहा हूँ, और कुछ घण्टों के लिए सोने जा रहा हूँ, मैं कोई अशांति नहीं चाहता हूँ, इसलिए न कोई अन्दर आये और न ही कोई मुझे परेशान करे, समझ गए न  तुम’|

बन्दर बोलै ‘हाँ मालिक, मैं आपके आदेश का पालन करूंगा ।’

शीघ्र ही राजा सो गया और बन्दर बड़ी ही सतर्कता से अपना कार्य करने लगा। वह राजा के पास जाकर खड़ा हो गया और सतर्कता से चौकसी करने लगा। तभी कुछ समय बाद एक मक्खी राजा के शयनकक्ष में घुस आयी। और सोते हुए राजा के नाक पर आकर भिनभिनाने लगी। राजा ने उसे खूब भगाया और करवटें बदलने लगा। उसकी शान्तिपूर्ण नीद में खलल पड़ रहा था।

बन्दर को राजा का आदेश अच्छी तरह से पता था, वह तुरन्त मक्खी को उड़ाने की कोशिश करने लगा, लेकिन मक्खी बार-बार राजा के चेहरे पर आ के भिनभिनाने लगती। बहुत कोशिशों के बाद बन्दर मक्खी को भगाने में सफल हो ही गया। ऐसा कर के बन्दर बहुत खुशा हुआ और खुद पर मुस्कराने लगा। तभी थोडी देर बाद मक्खी फिर वापस आ गयी। इससे बन्दर गुस्से में लाल पीला हो गया और उसने मक्खी को समाप्त करने का ही निश्चय कर लिया। उसने राजा की तलवार उठायी और मंडराती हुई मक्खी को ढूंढ़ने लगा। तभी अचानक मक्खी राजा की गर्दन पर बैठ गयी, बन्दर ने जैसे ही मक्खी को देखा तो ही उसे मारने के लिए उसने पूरी ताकत से मक्खी पर तलवार दे मारी।

उसने सोचा कि इससे वह मक्खी के दो टुकड़े कर देगा। पर दुर्भाग्य से तलवार मक्खी को नहीं लगी और राजा की गर्दन कट गयी और राजा मर गया। सारी प्रजा अपने राजा की मृत्यु से काफी दुखी हुईं और प्रजाजन इस दुर्घटना” पर विलाप करने लगे।

Short story for kids in hindi

गधे और व्यापारी की कहानी Donkey and Merchant Story in Hindi

donkey-and-merchant-story-in-hindi

एक गाँव में एक व्यापरी रहता था | उसका नमक का कारोबार था | वो रोज अपने गधे के साथ शहर
जाता,नमक बेचकर अपना गुजर करता था | शहर के रस्ते में एक छोटी सी नदी पड़ती थी| व्यापारी और गधे को शहर जाने के लिए रोज़ नदी पार करनी पड़ती थी |

एक दन जब वो दोनो नदी पार कर रहे थे | तब अचानक गधे का परै फसल गया | और वो नदी में गिर गया | लेकिन उसकी किसमत अच्छी थी जो उसे व्यापरी ने बचा लया | लेकिन नदी में गिरने के कारण गधे पर रखा नमक में पानी भर चूका था | अब शहर जाने का
कोई काम नहीं था | ये देख गधा बहुत खशु हुआ कि अब उसे वजन ,लेकर शहर नहीं जाना पड़ेगा |

लेकन व्यापारी बहुत दुखी था क्योकि उसे नमक में पानी भर चूका था | अगले दिन फिर से व्यापारी नमक गधे पर रखकर शहर की ओर नकला | लेकिन जैसे ही नदी आयी गधा जान बुझ कर नदी में गिर गया |


व्यापारी ने उसे फिर बाहर नकाला | गधा फिर बहुत खशु हुआ | लेकिन इस बार व्यापारी को पता चल चूका था की गधा जान बूझकर ऐसा कर रहा है | व्यापारी ने गधे को सबक सिखाने के लिए एक योजना बनायीं | अगले दिन जब वे शहर की और निकले तब उसने गधे पर एक बहुत बड़ी रुई कि गठरी रख दी |अब जब नदी आयी तो गधा फिर से जान बूझकर नदी में गिर गया लेकिन इस बार व्यापारी ने उसे बाहर तो निकला, लेकिन पानी में बिगने कि वजह से रुई में पानी भर गया और वो अपने वजन से कई गुना भारी हो गयी |

अब तो गधे से चला भी नहीं जा रहा था | जब गधा आगे नहीं चल रहा था तब व्यापारी ने उसकी खबू पटाई कि | इसके बाद गधे ने कभी भी पानी में गरने का ड्रामा नहीं किया |

Moral : हम अपना काम पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना चाहये |

Moral Stories in Hindi Video

Copyright © 2020 Wishestatus Theme by Nikunj, powered by WordPress.